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Kavita . समय धारा

एक तो  तेरे पास आज का खजाना है

सोच सोच इसे व्यर्थ क्यू गवाना है
क्षण क्षण  रेत सी गुजरती ये समय धारा है
जीने वाले ने बस एक सत्य स्वीकारा है
आज अभी जो भी तेरे पास है
बस वही इस पल  के लिए बहुत खास है

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हिँँदी के लिऐ book 
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कविता । हिंदी दिवस पर नीतेश कवि की कलम से 

🎷14/09/2017🎷🎺

🎹🎸🎼हिंदी दिवस पर हम याद कर रहे है हिंदुस्तान के हिंदी के हृदयस्पर्शी हस्ताक्षर सुप्रसिध्द गीतकार संगीतकार पार्श्वब गायक मातृभाषा के मूर्द्धन्य विद्वान पद्मश्री श्रद्धेय स्व। दादा डॉ. रविन्द्र जैन साहिव को जिन्हें हम और आप कभी नही भूला सकते है।
🌷🍀💐यह मेरा सौभाग्य रहा कि दादू के चरण मेरी कुटिया में पड़े सरगम की कलम से लिखी रचना पुरी पड़े।💐🍀🌷
कविवर कविन्द्र दादू रविन्द्र सरगम के महान सितारे थे।

हम सबका सौभाग्य था ये दादा आदर्श हमारे थे।।
🎤🎤वाणी के विशिष्ट थे, शब्दो के सरताज़।

भाषाओ के भूषण थे भारत की आवाज़।।
भाषा के तूम भास्कर, संस्कृति के तुम मीत।

शशि सम शीतलता भरा, दादू का संगीत।।
👄होंठो पर हिंदी सजी, हृदय में हिंदूस्तान।

रविन्द्र जैन के गीतों पर झुमा सकल जहान।।
शब्द पुष्प सुरभित मिले, खिले आधर श्रृंगार।

उन गीतों की महक से, महक उठा संसार।।
जिस जिसने जब जब सुने, रबिन्द्र जैन के गीत।

उन सबको अपने लगे, सुख दुख में मन मीत।।
भाबो से भरपूर है, सुख दुख का संगीत।

सच्चा है साथी यही, सदा निभाये प्रीत।।
शब्द शब्द मोती हुए, गीत हो गये हार।

सोभा पाई कंठ ने, वाणी ने श्रृंगार।।
अलंकार रस छंद से, माला लाई बनाये।

हिंदी विन्दी हिन्द की, हिये को रही हर्षाये।।
सुर सरगम संगीत के रविन्द्र जैन सम्राट।

दुनिया के दिल मे वासे, दादू खोल कपाट।।
ऐसे हिन्द रविन्द्र को, भावांजलि विशेष।

शीश झुका वंदन करे, कवि सरगम नीतेश।।

🌷🍀💐🎺🎷🎼🎹🎸🥁कवि संगीतकार गायक 

नीतेश जैन सरगम 

परसोरिया मकरोनिया सागर 

मध्यप्रदेश भारत🍀🎺💐🎷🎸🌷🎹🥁

Kalakar najar aata hu

कारीगर हूँ साहब 

अल्फ़ाज़ो’ की मिट्टी से ‘महफ़िलों’ को सजाता हूँ.।

कुछ को ‘बेकार’ ……

कुछ को ‘कलाकार’ नज़र आता हूँ” ।।
From

Nitesh jain sargam

Sagar MP