भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान IIM के
दीक्षांत समारोह में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले
विद्यार्थी ने उद्योगपति धीरुभाई अम्बानी से पुरस्कार लेने
के बाद कहा, “मिस्टर अम्बानी, यदि मेरे पास आपकी जमा-
पूँजी का आधा भी होता, तो मैं उसको दोगुना कर के
दिखा देता।” धीरुभाई ने बड़े प्रेम से जवाब दिया, “बेटा,
आपके पास जितनी उम्र की पूँजी बची है, उतनी अगर मेरे
पास बची होती, तो मैं 100 गुना जमा-पूँजी बना लेता।” …
युवाओं के पास उम्र और ऊर्जा की शक्ति होती है, लेकिन
बुजुर्गों के पास अनुभव के तपन से निकली हुई वह
शक्ति होती है, जो किसी संस्थान से नहीं मिल सकती।
“शिकस्ता* कश्ती को पार ले कर, महज हमारा हुनर गया है
नए खेवैये कहीं न समझें, नदी का पानी उतर गया है” (-
उदय प्रताप जी)
*[शिकस्ता – जर्जर]
हम भारतीयों का तो हर दिन माता, पिता, गुरुजनों और वरिष्ठ
साथियों के चरण छू कर शुरू होता है, अच्छी बात यह है,
कि यह सन्देश पूर्व से चल कर पश्चिम तक भी पंहुचा है,
और पंहुच रहा है, कि बुज़ुर्ग महज़ बुज़ुर्ग नहीं, धरोहर हैं।
उन्हें ध्यान, प्रेम और सान्निध्य की आवश्यकता है, जो हम
और आप ही दे सकते हैं। आज, अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध-जन
दिवस पर आयु, अनुभव, तपस्या, साधना, त्याग, और
आत्मबल के साकार स्वरुप सभी वरिष्ठों को आत्मा भर
प्रणाम!