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खड़े होकर खाना क्यों नहीं खाना चाहिए!
भोजन से ही हमारे शरीर को कार्य करने
की ऊर्जा मिलती है। हमारे
देश में हर छोटे से छोटे या बड़े से बड़े कार्य से जुड़ी कुछ
परंपराए
बनाई गई हैं।
वैसे ही भोजन करने से जुड़ी हुई भी कुछ मान्यताएं हैं।
भोजन हमारे
जीवन की सबसे आवश्यक जरुरतों में से एक है।
खाना ही हमारे
शरीर को जीने की शक्ति प्रदान करता है।हमारे पूर्वजो ने
जो भी परंपरा बनाई थी उसके पीछे कोई गहरी सोच थी।
ऐसी ही एक परंपरा है खड़े होकर या कुर्सी पर बैठकर
भोजन
ना करने की क्योंकि ऐसा माना जाता है कि खड़े होकर
भोजन करने
से कब्ज की समस्या होती है। इसका वैज्ञानिक कारण यह
है
कि जब हम खड़े होकर भोजन करते हैं तो उस समय
हमारी आंते
सिकुड़ जाती हैं। और भोजन ठीक से नहीं पच पाता है।
इसीलिए जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना खाने
की परंपरा बनाई
गई। हम जमीन पर सुखासन अवस्था में बैठकर खाने से
कई
स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर शरीर को ऊर्जावान और
स्फूर्तिवान बना सकते हैं।
जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम एक विशेष
योगासन
की अवस्था में बैठते हैं, जिसे सुखासन कहा जाता है।
सुखासन
पद्मासन का एक रूप है। सुखासन से स्वास्थ्य संबंधी वे
सभी लाभ
प्राप्त होते हैं जो पद्मासन से प्राप्त होते हैं।बैठकर
खाना खाने
से हम अच्छे से खाना खा सकते हैं। इस आसन से मन
की एकाग्रता बढ़ती है। जबकि इसके विपरित खड़े होकर
भोजन
करने से तो मन एकाग्र नहीं रहता है।इस तरह खाना खाने
से
मोटापा, अपच, कब्ज, एसीडीटी आदि पेट
संबंधी बीमारियों होती हैं।