“बात ऊँची थी मगर बात ज़रा कम आकीं,
उस ने जज़्बात कि औकात ज़रा कम आकीं ,
वो फ़रिश्ता मुझे कह कर ज़लील करता रहा ,
मैं हूँ इंसान मेरी जात ज़रा कम आकीं …”