सामने मन्जिल थी,
पीछे थी आवाज उसकी,

रुकते तो सफर छुट जाता,
चलते तो उससे भिछड जाते,

मन्जिल कि भी हसरत थी,
ओर उससे मुहोब्बत भी,

एेदिल ये बता मुझको
उस वक्त मे कहाँ जाता,

मुद्दत का सफर भी था,
ओर बर्षो कि चाहत भी थी,

रुकते तो बिखर जाते,
चलते तो दिल टूट जाते,

यु समझ लो की ……

लगी प्यास गज़ब कि थी,
ओर पानी मे भी ज़हर था,

पीते तो मर जाते,
ओर न पीते तो भी मर जाते….!!!!

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