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“गुजरी हुई जिंदगी को
कभी याद न कर,

तकदीर मे जो लिखा है
उसकी फर्याद न कर…

जो होगा वो होकर रहेगा,

तु कलकी फिकर मे
अपनी आज की हसी बर्बाद न कर…

हंस मरते हुये भी गाता है
और
मोर नाचते हुये भी रोता है….

ये जिंदगी का फंडा है बॉस

दुखो वाली रात
निंद नही आती
और
खुशी वाली रात
.कौन सोता है

” लब्ज़ ही ऐसी चीज़ है
जिसकी वजह से इंसान
या तो दिल में उतर जाता है
या दिल से उतर जाता है ”

ज़िन्दगी के इस कश्मकश मैं
वैसे तो मैं भी काफ़ी बिजी हुँ ,
लेकिन वक़्त का बहाना बना कर ,
अपनों को भूल जाना मुझे आज भी नहीं आता !

जहाँ यार याद न आए वो तन्हाई किस काम की, बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की, बेशक अपनी मंज़िल तक जाना है ,
पर जहाँ से अपना दोस्त ना दिखे
वो ऊंचाई किस काम की ..

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