किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ;
बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ!

हाथों की लकीरों पर मत जा ऐ ग़ालिब;
नसीब उन के भी होते हैं जिन के हाथ नहीं होते।