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आग शोला चिंगारी लपट भी है
जिंदगी होसलो की खूबसूरत लिखावट भी है
हँसी खुशी मज़ा मुस्कान भी है
जिंदगी नदी किनारे खुद का मकान भी है.

सिक्के रुपया पैसा कमाई भी है
जिंदगी की पूंजी हमने अपनो पर लुटाई भी है
फूल कुसुम मस्त फुलवारी भी है
जिंदगी माली के हाथो जैसी सुंदर आरी भी है

लड़कियाँ बच्चियाँ बेटियाँ भी है
जिंदगी हाथ से बनी प्यारी रोटियाँ भी है
सीना ह्रदया दिल भी है
मेरा दिल कई ज़िंदगियों की मंज़िल भी है

दस्तक पुकार अंदर की आवाज़ भी है
जिंदगी साथ चलने वाली मेरी हमराज़ भी है
साथी सखा दोस्त हमसफ़र भी है
ज़िंदगी को चमकाए ये वो जेवर भी हैं

नगर महानगर कस्बा शहर भी है
ज़िंदगी भर घर कर जाए ,वो एक नज़र भी है
छोटा कुनबा आस पड़ोस गाँव भी है
जिंदगी धधकती दोपहर मैं बरगद की ठंडी छाँव भी है.
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जिंदगी के कुछ पहलूओं को समझने का छोटा सा प्रयास
—- विवेक जैन

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