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आंखो के किनारे भीग जाते है..
जब मै किन्न्ही आंखो की बेबसी देखता हु..

यादो के चिराग लेके चल रहा हु
वादो की राह आसान लग रही ह ..

मेने की थी मोहब्बत समुंदर जितनी
तुझे खोने के गम मै कतरा कतरा बह गया…

कहने को तो मै बडा हो गया हु मगर
पिता की अंगुलिया आज भी बडी लगती है..

होश मै आया था मै एक दिन..
आज का माहोल देख वापिस बेहोशी ओड ली…

By विवेक …