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बाल दिवस पर लिखी कविता !!

अब तुम्हे क्या हो गया है

क्यों वो बच्चा अंदर सो गया है

बिना हिचक जो पेड़  चड जाता था

बिना हिचक जो रोता हंसता और हँसाता था

जिसके दिल मैं विश्वास लबालब उफनता था

शंका को जो यूही ठुकरता था

बस बिना सोचे जो कुछ भी कर जाता था

मगर अब तुम्हे क्या क्या हो गया है

क्यों वो बच्चा अंदर सो गया है

 

जो बारिश के पानी मे उम्मीद की नाव चलाता था

डूबने पर उसके गम नही मनाता था

पिछली सारे दर्द को एक पल मैं भूल जाता था

धरती को माँ और चाँद को मामा बतलाता था

मगर अब तुम्हे क्या क्या हो गया है

क्यों वो बच्चा अंदर सो गया है