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आँखे तुम्हारी एक दरवाजा है
क्या मैं इनसे तुम्हारी आत्मा तक जा सकता हूँ ?

आँखे तुम्हारी झील की तरह हैं
क्या मैं इनके किनारे घर बना सकता हूँ ?

आँखे तुम्हारी बच्चो की तरह हैं
क्या मैं इनसे कुछ देर खेल सकता हूँ

आँखे तुम्हारी जीवन का खजाना हैं
क्या मुझे कुछ पल उधार मिल सकते हैं ?

आँखे तुम्हारी नशीली बहुत है
कुछ तो उपाय बताओ इनसे निकलू कैसे

आँखे तुम्हारी शशि की चाँदनी है
क्या ये हमेशा ऐसी ही ठंडक देंगी

आँखे तुम्हारी राधा की तरह है
ये सिर्फ़ अपने श्याम को ही ताकती है

आँखे तुम्हारी मीरा जैसी है
ये बस श्याम श्याम ही गाती है

— विवेक