Tags

, , ,

गुरुरे मुलाज़िम की मुलतजा मैं सबक न आएगा
ज़ालिमे हसीना के रिवाजो करम मैं हलक न आएगा
आज हो जाए बेशॅक जर्रे जर्रे की इंतहा
दिन गुजर जायगा मगर ये शेर समझ ना आएगा

— विवेक
🙂🙂