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एक बार बंदरों ने सभा बुलाई और प्रस्ताव
रखा कि हमें ये मानव जो की
पूर्व में हमारे ही जैसे थे किन्तु आज
तरक्की करके हमको ही अपने
खेतों और फलदार वृक्षों पर से भगा देते हैं
इसलिए आज से हम भी खेती करेंगे और अपने लिए फलदार वृक्ष
लगायेंगे।
सर्वसम्मति से प्रताव पास हो गया और तय हुआ कि सब एक
एक प्रकार का बीज लायें और नदी के
किनारे पर बोयें। सबने आदेशानुसार बीज बो दिए और सब हाथ
पर हाथ रख करके
जमा हो कर बैठ गये ।इन्तिज़ार करते करते
1घंटा बीत गया कोई
परिणाम नही दिखाई दिया तो सबने
खोदकर देखे फिर वापस गाढ़ दिये । इसी तरह बार बार थोड़ी थोड़ी देर खोद कर वापस गाढ़ने
की प्रकिया करते रहे ।किन्तु परिणाम कुछ न पा कर घोषित कर
दिया ये सारे बीज ही ख़राब हैं । ठीक ऐसे ही कुछ मेरे
देशवासी भी मोदी सरकार से अपेक्षा कर बैठे थे कि बस इधर मोदीजी पी एम् बने और
हमारी सारी समस्याएं ख़त्म ।
मित्रो समय लगेगा अच्छे परिणाम भी आयेंगे ;धैर्य रखें
मोदीजी योजनाबद्ध कार्य करते हैं ;
बन्दरों की तरह खेती नही करते ।

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