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चना ज़ोर गरम और पकोडे प्याज़ के …
चार दिन मे सूखेंगे कपड़े ये आज के …

आलस और खुमारी बिना किसी काज के …
टर्राएँगे मेंढक फिर बिना किसी साज़ के …

बिजली की कटौती का ये मौसम आया है …
हमारे घर आँगन आज सावन आया है …

भीगे बदन और गरम चाय की प्याली …
धमकी सी गरजती बदली वो काली …

नदियों सी उफनती मुहल्ले की नाली …
नयी सी लगती वो खिड़की की जाली …

छतरी और थैलियों का मौसम आया है …
हमारे घर आँगन आज सावन आया है …

निहत्थे से पौधो पे बूँदो का वार …
हफ्ते मे आएँगे अब दो-तीन इतवार …

पानी के मोतियों से लदा वो मकड़ी का तार…
मिट्टी की खुश्बू से सौंधी वो फुहार …

मोमबत्तियाँ जलाने का मौसम आया है…
हमारे घर आँगन आज सावन आया है …