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साब मुझे आपके बैंक में
खाता खुलवाना है..”
“कितनी उमर है तेरी?”
“तेरह साल..”
“काम क्या करता है?”
“रेलगाड़ी में चाय बेचता हूं”
“राशन कार्ड है?”
“हां है ”
“बिजली बिल की कापी ?”
“हां वो भी है..”
“वोटर कार्ड ?”
“तेरह का हूं साब.”
“स्कूल का कार्ड..”
“लाया हूं साब.
“फोटो..”
“है साब.. कितना दूं..?”
“लाइसेंस..”
“हद्द है साब..”
“ओके ओके.. चल फार्म भर दे अभी..”
******
“लो साब भर दिया..”
“ओके… एक मिनट.. ये इंट्रोड्यूसर
का साइन तो रह गया.. कोई है
तेरी जान पहचान
का जिसका खाता हमारे यहां हो..”
“नही साब.. मेरी पहचान का कोई
नहीं है..पर मैं सारे कागज तो दे
रहा हूं..”
“नहीं बेटा.. ऐसे खाता नहीं खुलता..
जा कोई पहचान वाला ले के आ फिर
खुलेगा..
लंच करने जा रहा हूं अभी मै,तंग मत
करियो.”
इस बैंक वाले ने जो उस ‘चायवाले’ के
साथ 50 साल पहले किया था,
उसका हिसाब
चायवाले लड़के ने आज पूरा कर लिया..

Very good step Modi Ji.

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