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दसलक्षण पर्व जैन धर्म के दस लक्षणों को दर्शातेहैं। जिनको अपने जीवन में उतार कर हम मनुष्य मुक्ति का मार्ग अपना सकता है।
दसलक्षण के दस धर्मों की शिक्षा
1*उत्तम क्षमा –
क्षमा को धारण करनेवाला समस्त जीवों के प्रति मैत्रीभाव को दर्शाता है।
2*उत्तम मार्दव –
मनुष्य के मान और अहंकार का नाश करकेउसकीविनयशीलता को दर्शाता है
3*उत्तम आर्जव –
इस धर्म को अपनाने से मनुष्यनिष्कपट एवं राग-द्वेष से दूर होकर सरल ह्रदय सेजीवन व्यतीत करता है।
4*उत्तम सत्य –
जब जीवन में सत्य धर्म अवतरित हो जाता है, तब मनुष्य की संसार सागर से
मुक्ति निश्चित है।
5*उत्तम शौच –
अपने मन को निर्लोभी बनानेकी सीख देता है, उत्तम शौच धर्म। अपने जीवन में
संतोष धारण करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है।
6*उत्तम संयम –
अपने जीवन में संयम धारण करके
ही मनुष्य का जीवन सार्थक हो सकता है।
7* उत्तम तप – जो मनुष्य कठिन तप के द्वारा अपने तन-मन को शुद्ध करता है, उसके कई जन्मों के कर्मनष्ट हो जाते हैं।
8* उत्तम त्याग – जीवन के त्याग धर्म
को अपना कर चलने वाले मनुष्य को मुक्ति स्वयंमेव प्राप्त हो जाती है।
9*उत्तम आंकिचन –
जो मनुष्य जीवन के सभी प्रकार के परिग्रहों का त्याग करता है।उसे मोक्ष सुख की प्राप्ति अवश्य होती है।
10* उत्तम ब्रह्मचर्य –
जीवन में ब्रह्मचर्य धर्म के पालनकरने से मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती है।इस प्रकार दस धर्मों को अपने जीवन में अपना कर जो व्यक्ति इसके अनुसार आचरण करता है, वह निश्चित हीनिर्वाण पद को प्राप्त करसकता है। पयुर्षण पर्व के यह दस दिन हमें इस तरहकी शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा देते है औरनिरंतर क्षमा के पथ पर आगे बढ़ाते हुए मोक्ष
की प्राप्ति कराते हैं।
11.अत: क्षमावाणी के दिन बिना किसी संकोच के तन-मन से सभी से
क्षमायाचना मांगना (करना) ही जैन धर्म
का उद्देश्य है।क्षमावाणी पर्व पर मैं दिल से सभी से क्षमायाचना करता हूं।