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आजकल हर ज़बान पर मेरे चर्चे हैं,
गॅली गली चिपके मेरी इंसानियत के पर्चे हैं
सालो से जो अनसुना कर रहा था मुझे
सुना कुछ शब्द कल मेरे दुश्मन ने भी मेरी तारीफ़ में खर्चे हैं !

– Vivek jain