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मुनि श्री १०८ क्षमा सागर जी महाराज की कविता

नदी आयी है

एक नदी
मुझसे मिलने
सुना है, सारे रास्ते
दौड़ती हाँफती आयी है.
पर मेरे समीप आकर,
मुझमें समाने से पहले
देख रहा हूँ
वह, एकदम शांत हो गयी है.
उसे देखकर
जरा भी तो नहीं लगता
कि थकी हारी
मुसीबतों को पार करती हुई
आयी होगी.
सोच रहा हूँ कि 
क्या अपने में समाने
से पहले,
हम इतने ही शांत
हो जाएँगे ?