Tags

,

एक बुन्देलखंडी की तपस्या से प्रसन्न होकर
भगवान उसको अमृत देते हैं तो
वो मना कर देता है
भगवान – क्यों वत्स..अमृत क्यों नहीं पी रहे.
बुन्देली – अभ्भईं तो गुटका खाओ है प्रभु |

————–