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हिंदू महिलाओं में कलाइयों में चूड़ियां पहनना, पैरों में पायल पहनना, माथे पर बिंदी, नाक में कील, गले में मंगलसूत्र आदि पहनना कई लोगों को फैशन से ज्यादा कुछ नहीं लगता होगा। यहां तक कि इन्हें अपने बुजुर्गों के कहने पर धारण करने वाली महिलाएं भी इन्हें बोझ या फैशन समझकर पहन लेती हैं। लेकिन, सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियां, लौंग और पायल इन सबसे जुड़ा विज्ञान कम ही लोग जानते हैं। आइए जानें…
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1⃣सिंदूर लगाने के पीछे क्या है विज्ञान : सदियों से विवाहित हिंदू महिलाएं मांग में सिंदूर लगाती रही हैं। सिर के बालों के दो हिस्से(parting) में सिंदूर लगाया जाता है। इस बिंदु को महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। इस जगह सिंदूर लगाने से दिमाग हमेशा सतर्क और सक्रिय रहता है। दरअसल, सिंदूर में मरकरी होता है जो अकेली ऐसी धातु है जो लिक्विड रूप में पाई जाती है। यही वजह है कि सिंदूर लगाने से शीतलता मिलती है और दिमाग तनावमुक्त रहता है। सिंदूर शादी के बाद लगाया जाता है क्योंकि माना जाता है शादी के बाद ही महिला की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और दिमाग को शांत और व्यवस्थित रखना जरूरी हो जाता है।
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2⃣ कांच की चूड़ियां : शादीशुदा महिलाओं का कांच की चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। नई दुल्हन की चूड़ियों की खनक से उसकी मौजूदगी और आहट का एहसास होता है। लेकिन इसके पीछे एक विज्ञान छुपा है। दरअसल, कांच में सात्विक और चैतैन्य अंश प्रधान होते हैं। इस वजह से चूड़ियों के आपस में टकराने से जो आवाज़ पैदा होती है वह नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है।
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3⃣ मंगलसूत्र पहनने से जुड़ा विज्ञान : माना जाता है कि मंगलसूत्र धारण करने से रक्तचाप(ब्लड प्रेशर) नियमित रहता है। कहा जाता है कि भारतीय हिंदू महिलाएं काफी शारीरिक श्रम करती हैं इसलिए उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहना जरूरी है। बड़े-बुजुर्ग सलाह देते हैं कि मंगलसूत्र छिपा होना चाहिए। इसके पीछे का विज्ञान यह है कि मंगलसूत्र (उसमें लगा सोना) शरीर से टच होना चाहिए ताकि वह ज्यादा से ज्यादा असर कर सके।
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4⃣ बिछुआ पहनने के पीछे का विज्ञान : शादीशुदा हिंदू महिलाओँ में पैरों में बिछुआ जरूर नजर आ जाता है। इसे पहनने के पीछे भी विज्ञान छिपा है। पैर की जिन उंगलियों में बिछिया पहना जाता है उसका कनेक्शन गर्भाशय और दिल से है। इन्हें पहनने से महिला को गर्भधारण करने में आसानी होती है और मासिक धर्म चक्र भी नियम से चलता है। वहीं, चांदी(आमतौर पर बिछुआ चांदी की होती है) होने की वजह से जमीन से यह ऊर्जा ग्रहण करती है और पूरे शरीर तक पहुंचाती है।
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5⃣ नाक की लौंग से जुड़ा विज्ञान : नाक में लौंग पहने के पीछे का विज्ञान कहता है कि इससे श्वास को नियमित होती है।
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6⃣ कुमकुम से जुड़ा विज्ञान : कुमकुम भौहों के बीच में लगाया जाता है। यह बिंदु अज्ना चक्र कहलाता है। सोचिए जब भी आपको गुस्सा आता है तो तनाव की लकीरें ङोहों के बीच सिंमटी हुई नजर आती हैं। इस बिंदु पर कुमकुम लगाने से शआंति मिलती है और दिमाग ठंडा रहता है। यह बिंदु भगवान शिव से जुड़ा होता है। कुमकुम, तिलक, विभूति, भस्म सब माथे पर ही लगाए जाते हैं। इनसे दिमाग को शांति मिलती है।
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7⃣ कान में बालियां, झुमके पहनने का विज्ञान : कानों में झुमके, बालियां आदि पहनना फैशन ही नहीं। इसका शरीर पर अक्युपंचर प्रभाव भी पड़ता है। कान में छेद कराकर उसमें कोई धातु धारण करना मासिक धर्म को नियमित करने में सहायक होता है। शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए सोने के ईयररिंग और ज्यादा ऊर्जा को कम करने के लिए चांदी के ईयररिंग्स पहनने की सलाह दी जाती है। इसी तरह अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अलग-अलग धातु के ईयररिंग्स पहनने की सलाह दी जाती रही है।
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8⃣ पैरों में पायल पहनने से जुड़ा विज्ञान : चांदी की पायल पहनने से पीठ, एड़ी, घुटनों के दर्द और हिस्टीरिया रोगों से राहत मिलती है। साथ ही चांदी की पायल हमेशा पैरों से रगड़ाती रहती है जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फ़ायदेमंद है। इससे उनके पैरों की हड्डी को मज़बूती मिलती है।
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