आँखों मे आँसू ——
आपके कर्मों से मिलते हैं,
प्रभु से शिकायत करना ——
अपनी मूर्खता है.
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पाप करते वक्त ——
पीठ थपथपाने वाले बहुत मिलेंगे,
पर उसके परिणाम ——
अकेले को ही भुगतने पड़ेगे.
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बोलने से पहले ——
लफ्ज इंसान के गुलाम होते हैं,
लेकिन बोलने के बाद ——
इंसान लफ्ज का गुलाम बन जाता है.
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ज़िंदगी में पीछे देखोगे ——
तो अनुभव मिलेगा,
ज़िंदगी में आगे देखोगे ——
तो आशा मिलेगी,
दांए–बांए देखोगे ——
तो सत्य मिलेगा,
लेकिन अगर भीतर देखोगे ——
तो परमात्मा मिलेगा, आत्मविश्वास मिलेगा.
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पके हुए फल की ——
तीन पहचान होती हैं.
एक तो वह नर्म हो जाता है,
दूसरे वह मीठा हो जाता है,
तीसरे उसका रंग बदल जाता है,
जिसमें ये लक्षण ना हों वह कभी पका
हुआ नहीं हो सकता है.

इसी तरह से ——
परिपक्व व्यक्ति की भी तीन पहचान होती हैं.
पहली उसमें नम्रता होती है,
दूसरे उसकी वाणी में मिठास होती है,
और तीसरे उसके चेहरे पर आत्मविश्वास का रंग होता है.
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हम चाहे ——
कितने भी वाहनों से सफर करें,
लेकिन घर के अंदर ——
अपने पैरों से न आएँ तो मरीज कहलाते हैं.

इसी तरह से ——
साधन चाहे कोई भी हो,
हमारी साधना से ही ——
हम भीतर में जाते हैं.
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