गुरू से शिष्य ने कहा: गुरूदेव ! एक व्यक्ति ने आश्रम के लिये गाय भेंट की है।

गुरू ने कहा – अच्छा हुआ 
। दूध पीने को मिलेगा।

एक सप्ताह बाद शिष्य ने आकर गुरू से कहा: गुरू   ! जिस व्यक्ति ने गाय दी थी,
आज वह अपनी गाय वापिस ले गया ।

गुरू ने कहा – अच्छा हुआ !
गोबर उठाने की झंझट से मुक्ति मिली।

‘परिस्थिति’ बदले तो अपनी ‘मनस्थिति’ बदल लो । बस दुख सुख में बदल जायेगा.।

          “सुख दुख आख़िर दोनों
         मन के ही तो समीकरण हैं।” ☺👍:)🙏👏