एक इंजीनियर था। उसके घर पर बहुत मच्छर हो गए, तो उनसे परेशान होकर उसने मच्छरदानी लगानी शुरू की। अब हुआ यूं कि भाई साहब की मच्छरदानी में एक छेद हो गया। अब उसमें से मच्छर अंदर आते और काटते, सो तकलीफ जस की तस बनी रही। सिलाई करना आता नहीं था, अब करें तो करें क्या? आखिर उसके इंजीनियर दिमाग ने एक उपाय ढूंढ ही निकाला। उसने उस छेद के सामने दूसरी तरफ एक और छेद कर दिया और एक छोटा पाइप लेकर आर पार कर दिया। अब मच्छर एक छेद में से जाते दूसरे में से बाहर निकल जाते। बोलो इंजीनियर बिरादरी की जय हो!