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मंगलमय प्रभात…

गुनाहो के हिसाब तमाम रखने लगा हूँ
अब अपने काम से काम रखने लगा हूँ

किसी की गलतियां नहीं गिनाता अब
खुद पर ही सारे इल्जाम रखने लगा हूँ

भले छोटा परिंदा हूँ पर हौंसला बहुत है
ऊँची परवाज़ ऊँचे मुकाम रखने लगा हूँ

जब शालीन था सबने सताया था बहुत
इसलिए अब जुबां बेलगाम रखने लगा हूँ।

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